खेती-किसानी

Cumin Farming: बेमौसम बारिश के कारण 3 महीने की मेहनत पर फिरा पानी, जीरे की फसल का हुआ नुकसान, किसान हुए चिंतित

Cumin Farming: बदलते मौसम के अनुसार किसान हर साल कई तरह की फसल का उतपादन करते है। ऐसे में ही किसानों ने जीरे की खेती करना भी शुरू कर दिया है। जीरा का प्रमुख उत्पादक भारत में किया जाता है। गुजरात और पश्चिम राजस्थान का घरेलू उत्पादन में 90% से अधिक का योगदान है। साथ ही, प्रदेश के बाड़मेर, नागौर, जालोर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में जीरा पैदा होता है। लेकिन इस बार भाव अच्छा होने के बाद भी किसान परेशान है। क्योकि बेमौसम हुई बारिश से बाड़मेर जिले में जीरे की फसल को काफी नुकसान हुआ है।

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कई दिनों से ख़राब मौसम होने की वजह से किसानों को काफी बड़ी मात्रा में जीरे की फसल खराब हुई है। इसलिए किसान किसान काफी मायूस हो रहे है, इतना ही नहीं किसान के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं। बारिश से जीरा खलिहान में पहुंचने से पहले ही नष्ट हो गया है। इस बार जीरे का भाव अच्छा है लेकिन उत्पादन कम होने की वजह से दाम में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

तेज बारिश होने की वजह से पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर जिले में गुड़ामालानी, चौहटन, धनाऊ, ईटादा, सेड़वा, शिव ,गडरारोड़ के खेतों में बारिश का पानी तलातल भरा हुआ है। मानो जैसे फसल तो नजर ही नहीं आ रही है। प्रतिकूल मौसम से जीरे की फसल को बड़ा नुकसान होता है। मौसम अनुकूल नहीं होने पर जीरा ‘जीव का बैरी’ बन जाता है, जीरे की फसल को लेकर मारवाड़ में लोकगीत भी प्रचलित है। आपको बता दें बेमौसम हुई बारिश से खड़ी फसलों में 50 से 70 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है, जिससे किसान काफी चिंतित है।

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जानकारी के लिए बता दें जिला कलेक्टर निशांत जैन ने बताया कि प्राथमिक आकलन की सूचना के आधार रबी फसल के तहत जिले में हुई बंपर बुआई के बाद बिना मौसम बारिश होने से 33 फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ है। जिले में तहसीलदार और कृषि विभाग के 12 तहसीलों में विशेष तरह की हानि हुई है। इतना ही नहीं जिला कलेक्टर निशांत जैन के निर्देश पर धनाऊ सहित आसपास के गांवो में सम्बंधित तहसीलदार द्वारा निरीक्षण कर विशेष शासन द्वारा फसल की बुबाई के लिए दस्तावेज में दर्ज कराये है।

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