Tuesday, September 27, 2022
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देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने को लेकर हवा तेज़, क्या हो सकता है ऐसा

देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने को लेकर हवा तेज़, क्या हो सकता है ऐसा केंद्र सरकार ने देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने के लिए कवायद तेज कर दी है। सरकार ने इस मुद्दे का अध्ययन करने के लिए मामला विधि आयोग को सौंपा है। केंद्र सरकार ने देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने के लिए कवायद तेज कर दी है। सरकार ने इस मुद्दे का अध्ययन करने के लिए मामला विधि आयोग को सौंपा है ताकि व्यावहारिक रोडमैप और रूपरेखा तय की जा सके। लोकसभा के अगले चुनाव लगभग दो वर्ष बाद 2024 में होंगे जिसके साथ छह राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने की जरूरत

इससे पहले वर्ष 2018 में विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऐसा माहौल है कि देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने की जरूरत है। आयोग ने उस समय सुझाव दिए थे कि संविधान के अनुच्छेद 83 (संसद के कार्यकाल), अनुच्छेद 172 (विधानसभा के कार्यकाल) तथा जनप्रतिनिधत्व कानून, 1951 में संशोधन करने के बाद चुनाव एक साथ करवाए जा सकते हैं। इससे देश के लगातार चुनाव मोड में रहने से निजात पाई जा सकती है।

इस समय विधि आयोग में कोई अध्यक्ष नहीं है और आयोग का कार्यकाल फरवरी 2023 में समाप्त At present there is no Chairman in the Law Commission and the term of the Commission ends in February 2023.

सरकार ने विधि आयोग को यह मुद्दा जरूर दिया है लेकिन इस समय विधि आयोग में कोई अध्यक्ष नहीं है और आयोग का कार्यकाल फरवरी 2023 में समाप्त होने वाला है। विधि आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज को बनाया जाता है। वहीं, इससे पूर्व 2016 में संसदीय समिति भी अपनी अंतरिम रिपोर्ट दे चुकी है। सरकार ने इस रिपोर्ट को भी आयोग को दिया है जिसे एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट में संसदीय समिति ने भी एक साथ चुनाव कराने की आवश्यकता बताई थी लेकिन कहा था कि सभी राजनीतिक दलों और क्षेत्रों की एक साथ चुनाव पर सहमति बनाने में एक दशक का समय लग सकता है।

केंद्र-राज्य सरकार आधा-आधा खर्च वहन करेंगे The central-state government will bear half the cost.
केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 से 2020 तक 5794 करोड़ रुपये जारी किए हैं। छह वर्ष की इस अवधि में 50 विधानसभा चुनाव और दो बार लोकसभा के चुनाव हुए हैं। नियमानुसार, लोकसभा चुनावों में पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है जबकि विधानसभा चुनावों का खर्च संबंधित राज्य उठाता है। सरकार का कहना है कि यदि चुनाव एक साथ हों तो यह खर्च आधा हो जाएगा और केंद्र तथा राज्य सरकारों को आधा-आधा खर्च ही वहन करना पड़ेगा।

जहां तक निर्वाचन आयोग का सवाल है तो वह पहले ही कह चुका है कि उसे एक साथ चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके लिए उसे बस वोटिंग मशीनों की संख्या बढ़ानी होगी जिसे वह एक तय समय में कर सकता है। बता दें कि देश में विधानसभा और लेाकसभा के चुनाव 1951 से लेकर 1967 तक एकसाथ हुए हैं।

करोड़ों का खर्च बचेगा crores will be saved
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते रहे हैं कि एक साथ चुनाव कराने से देश का करोड़ों रुपये का खर्च बच सकता है जो लगातार किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहने के कारण होता रहता है। वहीं, सुरक्षा बलों को भी पूरे देश में बार-बार भेजना पड़ता है जिससे उनका काम प्रभावित होता है। आदर्श आचार चुनाव संहिता लगने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।