Thursday, October 6, 2022
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Goswami Tulsidas Jayanti: आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती है, तो जाने हे क्यों मानते है जयंती ?

Goswami Tulsidas Jayanti : गोस्वामी तुलसीदास सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जयंती मनाते हैं। जो इस बार गुरुवार 4 अगस्त को है. गोस्वामी तुलसीदासजी का जन्म 1554 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के राजापुर गांव में हुआ था. श्री रामचरित मानस मंदिर इसी गांव में स्थित है, जहां तुलसीदासजी ने 966 दिनों में यह ग्रंथ लिखा था। संवत 1680 में उनकी मृत्यु हो गई।

कहा जाता है कि तुलसीदास जन्म के बाद रोए नहीं, बल्कि उनके मुंह से राम शब्द निकला। इसलिए बचपन में उनका नाम रामबोला था। ऐसा भी कहा जाता है कि तुलसीदास जी के जन्म से ही बत्तीस दांत थे।

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन
जन्म के बाद उनकी मां हुल्सी की मृत्यु हो गई। पिता का नाम आत्माराम था। बालक रामबोला प्रारंभ से ही विद्वानों की शरण में रहने लगा। बाद में बाबा नरहरि ने उनका नाम तुलसीदास रखा। नरहरि बाबा को तुलसीदास का गुरु माना जाता है। तुलसीदास का विवाह रत्नावली से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही वह अपनी पत्नी से दूर हो गया और श्रीराम की भक्ति में लीन हो गया।

तुलसीदास ने अपने 126वें जीवन में अनेक ग्रंथों की रचना की थी। इनमें श्री रामचरित मानस सबसे प्रसिद्ध है। बहुत से लोग प्रतिदिन इस पुस्तक के सुंदरकांड का पाठ करते हैं। तुलसीदास ने विनय पत्रिका और हनुमान चालीसा की भी रचना की।

शिव के कहने पर रचित श्री रामचरित मानस
ऐसा माना जाता है कि सपने में तुलसीदासजी के पास आने के बाद शिव ने आदेश दिया कि आप अपनी भाषा में कविता की रचना करें। मेरे आशीर्वाद से आपकी रचना सामवेद की तरह फलती-फूलती रहेगी। यह सपना देखकर उनकी नींद खुल गई। इसके बाद संवत् 1631 को रामनवमी के दिन वही योग बना जो त्रेतायुग में राम के जन्म के समय था। उस सुबह तुलसीदासजी ने श्री रामचरितमानस लिखना शुरू किया।

966 दिनों में लिखी गई रामचरितमानस
गोस्वामीजी ने वर्ष 1631 में रामचरित मानस लिखना शुरू किया। यह ग्रंथ संवत् 1633 के अघन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरा हुआ। यानी इसे पूरा करने में 2 साल 7 महीने 26 दिन लगे। कहा जाता है कि रचना पूर्ण होते ही तुलसीदास जी ने सर्वप्रथम यह ग्रंथ शिव को अर्पित किया। तब तुलसीदासजी इसे लेकर काशी गए और इस पुस्तक को भगवान विश्वनाथ के मंदिर में रख दिया। ऐसा माना जाता है कि सुबह उस पर सत्यम शिवम सुंदरम लिखा हुआ था।

मिथक: श्रीराम और हनुमानजी ने तुलसीदासजी को दिया था दर्शन
ऐसा माना जाता है कि तुलसीदासजी के यहां भगवान श्री राम और हनुमानजी आए थे। तुलसीदास जी जब काशी की तीर्थ यात्रा पर गए तो वे राम नाम का जाप करते रहे। इसके बाद हनुमानजी उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद उन्होंने हनुमानजी से भगवान राम के दर्शन की प्रार्थना की। हनुमान जी ने बताया कि श्री राम चित्रकूट में मिलेंगे। इसके बाद मौनी अमावस्या पर्व पर चित्रकूट में तुलसीदास जी को भगवान राम के दर्शन हुए।