Tuesday, September 27, 2022
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Ram Katha: हनुमान जी को बगीचे में देख छलक पड़े माता सीता के आंसू, सुनी उनकी जुदाई का दर्द

Ram Katha: हनुमान जी को बगीचे में देख छलक पड़े माता सीता के आंसू, सुनी उनकी जुदाई का दर्द अशोक वाटिका में हनुमान जी ने जब सीता माता को विश्वास दिला दिया कि वह प्रभु श्री राम के दूत हैं और पहचान के रूप में ही उनकी अंगूठी लेकर आए हैं तो माता सीता का उनके प्रति स्नेह जागा. सीता माता की आंखों में जल भर गया और उन्होंने कहा कि वह तो आशा ही छोड़ चुकी थीं किंतु अब तुमने मेरे सामने उपस्थित हो कर फिर से आस जगा दी है. उन्होंने कहा कि तुम तो मेरे लिए तिनके का सहारा के समान हो. सीता माता ने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी की कुशलक्षेम पूछने के बाद कहा आखिर रघुनाथ जी ने मुझे भुला क्यों दिया जबकि वह तो जीव मात्र पर कृपा करने वाले हैं. हनुमान जी ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि हे माता आप अपना दिल छोटा न करें. क्योंकि उनके मन में आपके प्रति स्नेह दोगुना है.

हनुमान जी ने सीता माता को श्री रघुनाथ का संदेश सुनाया

सीता माता को आश्वस्त करने के बाद हनुमान जी ने श्री रघुनाथ जी का सन्देश सुनाते हुए कहा कि हे सीता, अब मुझे तुम्हारे वियोग में कुछ भी अच्छा नहीं लगता, सब अनुकूल बातें प्रतिकूल लगने लगी हैं। पेड़ों के नए पत्ते भी अब आग की तरह, शांति देने वाली रात, अब कालरात्रि जैसी पीड़ा देने वाली और सभी को शीतलता देने वाली, चंद्रमा सूर्य की तरह गर्मी देने लगती है।

श्रीराम ने सीता माता को भेजे संदेश में बताया जुदाई का दर्द

हनुमान जी ने भगवान श्री राम का संदेश सुनाते हुए आगे कहा कि इतना ही नहीं, कमल के जंगल अब भाले की तरह चुभ रहे हैं। बारिश के ठंडे बादल अब खौलता हुआ तेल बरसते नजर आ रहे हैं। जो हमारा भला करने वाले थे, अब उन्हें दर्द दे रहे हैं। ठंडी, कोमल और सुगंधित हवा अब सांप की तरह जहरीली हो गई है। दूसरों को बताने से मन का दुख तो कम हो जाता है, लेकिन यहां अपना दुख भी बताऊं तो किसको। मेरे इस दुख को कोई नहीं जानता। ऐ मेरे और तुम्हारे प्यार का राज तो बस मेरा मन ही जानता है। और मेरा दिल हमेशा तुम्हारे साथ है। बस इसी में मेरे प्यार का सार समझो। श्रीराम का सन्देश सुनते ही जानकी जी उनके प्रेम में मग्न हो गईं और उन्हें अपने शरीर की भी परवाह नहीं थी।