इलाइची की खेती कम समय में किसान को बना देगी मालामाल, हर महीने होगी तगड़ी कमाई, जानिये खेती करने का आसान तरीका

Written by Shweta

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इलाइची की खेती कम समय में किसान को बना देगी मालामाल, हर महीने होगी तगड़ी कमाई, जानिये खेती करने का आसान तरीका इलायची की खुशबू बहुत अच्छी होने के साथ ही इसे खाने के कई फायदे भी है। इलायची का इस्तेमाल चाय से लेकर मिठाइयां बनाने में खूशबू के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। वहीं पान के स्वाद को बढ़ाने में भी इलाचयी का उपयोग किया जाता है। इस तरह देखा जाए तो अनेक खाने पीने की चीजों में इलायची का इस्तेमाल होता है। इसकी बाजार मांग को देखते हुए इसकी खेती किसानों के लिए काफी लाभकारी है। खास बात यह है कि बाजार में इलायची की कीमत 3000 रुपए किलोग्राम है। ऐसे में कम जगह पर इलायची की खेती करके भी अच्छा लाभ लिया जा सकता है।

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इलाइची कितने प्रकार की होती है

आपको बता दे की इलायची का पौधा 1 से 2 फीट लंबा होता है। इस पौधे का तना 1 से 2 मीटर तक लंबा होता है। इलायची के पौधे की पत्तियां 30 से 60 सेमी तक लंबाई की होती है व इनकी चौड़ाई 5 से 9 सेंटीमीटर तक होती है। इसके आलावा इलायची दो प्रकार की होती है। एक हरी इलायची और दूसरी भूरी इलायची होती है। भारतीय व्यंजनों में भूरी इलायची का उपयोग बहुत किया जाता है। इसका उपयोग मसालेदार खाने को और अधिक स्वादिष्ट बनाने और इसका स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। वहीं छोटी इलायची का उपयोग शुद्धता के लिए पान में किया जाता है। इसके साथ ही पान मसालों में भी इसका उपयोग होता है। चाय बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। इस कारण दोनों प्रकार की इलायची की मांग बाजार में बनी रहती है।

औषधि रूप में इलाइची का महत्व

आपको बता दे की मुख शुद्धि के अलावा छोटी इलायची का उपयोग कई रोगों को ठीक करने में सहायक है। इलायची औषधीय गुणों की खान है। छोटी इलायची को संस्कृत में एला, तीक्ष्णगंधा इत्यादि और लैटिन में एलेटेरिआ कार्डामोमम कहा जाता हैं। भारत में इसके बीजों का उपयोग अतिथिसत्कार, मुखशुद्धि तथा पकवानों को सुगंधित करने के लिए होता है। ये पाचनवर्धक तथा रुचिवर्धक होते हैं। आयुर्वेदिक मतानुसार इलायची शीतल, तीक्ष्ण, मुख को शुद्ध करनेवाली, पित्तजनक तथा वात, श्वास, खांसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रकृच्छ तथा हृदयरोग में लाभदायक होती है। वहीं बड़ी इलायची भी इसके सामान उपयोग होती है। बड़ी इलायची सांस लेने संबंधी बीमारियों को दूर रखने में मददगार होती है। इसके अलावा ये कैंसर के खतरे को भी दूर रखती है।

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इलाइची के खेती के लिए मिट्टी और जल वायु

अगर आप इलायची करने के बारे में सोच रहे है। तो इलायची की खेती करने के लिए मिट्टी लाल दोमट मिट्टी अच्छी मानी गई है। इसके अलावा इसकी अन्य प्रकार की मिट्टी में भी खाद व उर्वरकों का उपयोग करके इसे आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खेती के लिए भूमि का पीएच मान 5 से लेकर 7.5 तक होना चाहिए। वहीं जलवायु की बात करें तो इलायची की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु को सबसे अच्छा माना गया है। इसकी खेती के लिए 10 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है इलाइची की खेती के लिए ठंडे जल वायु की आवश्कता होती है इलाइची की खेती हमारे देश में केरला कर्नाटकन असम में की जाती है।

इलाइची की खेती

इलायची की खेती करने से पहले इसके लिए खेत की तैयारी करना जरूरी होता है। इसके लिए सबसे पहले आपको खेत की जुताई करके समतल कर लेना चाहिए। अगर खेत की मेड नहीं है तो मेड लगाने का कार्य जरूर करें। ताकि बारिश के समय में बारिश का पानी खेत से निकलकर बाहर नहीं जाए। इलायची के पौधों को लगाने से पहले एक बार खेत की जुताई रोटावेटर से जरूर कर दें।

खेत में कहा कहा लगा सकते है इलाइची का पौधा

यदि आप इलायची के पौधों को खेत की मेड पर लगाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक से 2 फीट की दूरी पर मेड बनाकर लगाना चाहिए। वहीं इलायची के पौधों को गड्ढों में लगाने के लिए 2 से 3 फीट की दूरी रखकर पौधा लगाना चाहिए। खोदे गए गड्ढे में गोबर खाद व उर्वरक अच्छी मात्रा में मिला देना चाहिए।

खेत में लगाने का उचित समय

अगर आप इलायची की खेती आपको बता दे की इलायची के पौधों को खेत में बारिश के मौसम लगाना चाहिए। वैसे भारत में जुलाई के महीने में इसे खेत में लगाया जा सकता है, क्योंकि इस समय बारिश होने से इसमें सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है। ध्यान रहे इलायची के पौधे को हमेशा छाया में ही लगाना चाहिए। बहुत अधिक सूर्य की रोशनी और गर्मी के कारण इसकी बढ़वार कम हो जाती है। इलायची के पौधों को गड्ढों या मेड पर लगाते समय पौधे से पौधे की बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

सिचाई में व्यवस्था

यदि बारिश के मौसम में यदि इसके पौधे को खेत में लगा रहे हैं तो इसमें सिंचाई की कम ही आवश्यकता पड़ती है। यदि बारिश कम हो तो इलायची के पौधे की पहली सिंचाई पौधे लगाने के तुरंत बाद करनी चाहिए। इसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए। वहीं गर्मी के मौसम में इसकी पर्याप्त सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। सिंचाई के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि पानी खेत में आवश्यकता से अधिक नहीं भरे, इसलिए खेत में पानी के निकास का उचित प्रबंध करें। वहीं खेत में आवश्यक नमी बनाए रखने के लिए 10 से 15 दिन के बाद इसकी आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए।

इलायची की खेती में इतनी होगी कमाई

अगर हम इलायची की खेती में कमाई की बात करे तो प्रति हैक्टेयर 135 से 150 किलोग्राम तक इलायची की उपज हासिल की जा सकती है। बाजार में इलायची के भाव 1500 से लेकर 2200 हजार रुपए प्रति किलोग्राम के बीच रहते हैं। ऐसे में 6-7 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

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