Makoi farming: कम लागत में शुरू करें इस फल की खेती, होगी अच्छी कमाई, कई बीमारियों के लिए है फायदेमंद

Written by Ankita

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Makoi farming: किसान अच्छी आय के लिए तरह-तरह की खेती करते है। लेकिन इससे उन्हें लागत ज्यादा लग जाती है और मुनाफा कुछ भी नहीं होता है। ऐसे में बिहार के गया जिला में ज्यादा उत्पादन रसभरी जिसे मकोय भी कहा जाता है। इसकी खेती की जा रही है। जिले के मानपुर प्रखंड क्षेत्र के सुरहरी, भूसंडा, भदेजा और बहोरा बिघा गांव में लगभग 10 बीघा में मकोय की खेती हो रही है। इसके आलावा विभिन्न जिलों के किसान भी इसकी फसल उगा रहे है। अभी तक कई सालो से करीब 20-25 किसान ही इसकी खेती कर रहे है।

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मकोय की खेती के लिए किसान जुलाई – अगस्त के महीने में पौधे लगाते है। और इसमें अक्टूबर नवंबर में फल लगाना शुरू हो जाता है। यह अप्रैल महीने में भरपूर फूलता-फलता है। गया के बाजारों में रसभरी की कीमत 50 रुपये किलो तक है इसके दाम में बाजार में घटते-बढ़ते रहते है। यह फल का स्वाद बहुत ही मीठा होता है।

आपको बता दें, इसकी खेती में धान, गेंहू और परंपरागत फसल से अधिक मुनाफा होता है। इसलिए गया जिले के किसान ने मकोय की खेती करना शुरू किया है। हर हफ्ते प्रति कट्ठा 20-25 किलो मकोय तोड़ा जाता है। विनोद रविदास ने बताया कि उन्होंने 15 कट्ठा में मकोय की खेती की है इससे उनकी अच्छी कमाई हो रही है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में भी मकोय की खेती की जा रही है।

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मकोय की खेती लगभग 9-10 महीने तक की होती है, यह फल एकदम टमाटर की तरह होता है। अगर आपने इसकी 15 कट्ठा में खेती की है तो आपको हर 5 दिन बाद 250 किलो मकोय तोड़ने को मिलेंगे। अगर आप इसकी खेती 20-25 सालो से कर रहे है तो इससे आपकी अच्छी बचत होगी और अधिक मुनाफा भी होगा।

सिविल सर्जन डॉ. रंजन कुमार सिंह ने बताया कि मकोय में विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है। इसे खाने से आंख की रौशनी बढ़ती है साथ ही मोतियाबिन्द भी कम होती है. इसके सेवन से हार्ट भी स्वस्थ रहता है और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल मे रहता है. इसका सेवन हर वर्ग के लोग कर सकते हैं और इसके सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है. साथ ही डायबिटिक पेशेंट भी इसका सेवन कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इसे खाने से कई तरह के फायदे होते हैं।