धर्म

700 साल पुराना मंदिर है चमत्कार, हर मंगलवार आती है मां कामाख्या, भक्तों की होती है हर मनोकामना पूरी

Mandir: हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ को भी विशेष महत्व दिया जाता है, पीपल के पेड़ में कई देवताओं का वास होता है। ऐसा में बिहार में स्थित एक मंदिर में पीपल के पेड़ की कहानी बहुत प्रचलित है। यह काफी पुराना मंदिर है। इस मंदिर में विश्व विख्यात माँ कामख्या मंदिर का ही दूसरा रूप यहां विराजमान है, यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह पूर्णिया जिला के नगर प्रखंड के मजरा पंचायत में स्थित यह मंदिर 700 साल पुराना है। इस मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं, तो आइये जानते है माता कामख्या के मंदिर के बारे में.

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माता के दर्शन

आपको बता दें माता कामख्या का मंदिर आसाम गुवाहाटी में है। इस मंदिर में मुख्य द्वार प्रवेश करने पर माता कामख्या के दर्शन होते है। माता का आशीर्वाद पाने के लिए लोग लम्बी लाइनों में लगकर पूजा करते है और माता को अपना दुःख सुनाकर आशीर्वाद प्राप्त करते है। इस मंदिर के सामने आकर अपना सिर झुकाते हैं।

मंदिर पुजारी के अनुसार

मंदिर के पुजारी गौरीकांत झा के अनुसार यह पीपल का वृक्ष 700 साल पुराना है। यह आंधी-तूफान में हिलता भी नहीं है। इसलिए इस मंदिर को बेहद चमत्कार मंदिर माना जाता है। मजरा के कामख्या मंदिर का चमत्कार देखकर आम लोग अचंभित हो जाते है। यहां जाने वाले भक्तों पर माता की कृपा बनी रहती है।

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प्राचीन मंदिर

माता कामाख्या एक मंदिर मजरा भवानीपुर में स्थित है, यह भी काफी प्राचीन मंदिरों में एक है। इस मंदिर की कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं। यहां के सभी सिद्ध पीठ में यह मंदिर काफी प्रचलित है। इस मंदिर में दूर-दूर से आकर लोग बच्चों के पवित्र मुंडन उपनयन एवं अन्य कई शुभ संस्कार करते हैं। जहां सिद्ध करने आए पुरुषों की सिद्धि के लिए पूरा इंतजाम होता है। इस मंदिर में हर मंगलवार को माता कामाख्या की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्था

मंदिर के पुजारी पंडित गौरीकांत झा का कहना है कि माता कामाख्या का मंदिर प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में एक सिद्ध पीठ मंदिर है। यहां भक्तों के लिए 4.14 करोड़ रुपए से मंदिर को पर्यटक स्थल बनाने की कवायत शुरू कर दी गई है। इसके लिए अभी कार्य चल रहा है। वन कुंड, श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम जगह बनाने की तैयारी की जा रही है। माता कामाख्या मंदिर का इतिहास लगभग 700 साल पुराना है, इसलिए इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने भारत के जिलों व नेपाल से आ रहे भक्तों की इच्छा पूरी हो जाती है।

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