Wednesday, October 5, 2022
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MP News: अनंत पुण्यवानी के प्रताप से मिलती है, सुख-सुविधाएं

MP News: अनंत पुण्यवानी के प्रताप से मिलती है, सुख-सुविधाएं- वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक स्थानक में तप चक्रेश्वरी अरुण प्रभा जी ने कहा कि अनंत पुण्यवानी के प्रताप से सुख-सुविधाएं मिलती हैं।

जिनवाणी का स्मरण करने से पुण्य की क्यारी खिलती है। सुख, महासुख और परमसुख। सबके मन में भावना रहती है परमसुख की। परमसुख मोक्ष में है। सिद्ध आत्माएं मोक्ष में है। सिद्ध कैसे है? जहां जन्म नहीं, मरण नहीं, शर

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक स्थानक में तप चक्रेश्वरी अरुण प्रभा जी ने कहा कि अनंत पुण्यवानी के प्रताप से सुख-सुविधाएं मिलती हैं। जिनवाणी का स्मरण करने से पुण्य की क्यारी खिलती है। सुख, महासुख और परमसुख। सबके मन में भावना रहती है परमसुख की। परमसुख मोक्ष में है। सिद्ध आत्माएं मोक्ष में है। सिद्ध कैसे है? जहां जन्म नहीं, मरण नहीं, शरीर नहीं, भूख नहीं, प्यास नहीं, सगे-संबंधी नहीं। लोक के अग्र भाग में सिद्ध आत्माएं विराजमान हैं। सिद्धशीला 45 लाख योजन की है। सिद्ध शीला दूज के चांद के आकार की है। आठ कर्मों को क्षय करके सिद्ध आत्मा बनती हैं।

परमसुख प्राप्त करने के लिए आत्मिक सुख की ओर बढ़ना होगा। यह भाव मन में आना चाहिए कि कब इस संसार को छोड़ू और संयम की और बढ़ूं। मेरी आत्मा अनंतकाल से कर्मों का बोझ बढ़ा रही है। संयम की ओर अग्रसर होने से कर्म की निर्जरा होती है। शतावधानी गुरु कीर्ति जी ने भी विचार रखे। संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया व महामंत्री जयंतीलाल डांगी ने बताया कि कविता वीरेंद्र कटारिया के मासक्षमण तप के 30 उपवास पूर्ण होने पर श्रीसंघ व नवयुवक मंडल की ओर से बहुमान किया गया। संघरत्न इंदरमल जैन, प्रेमकुमार जैन मोगरा, अमृत कटारिया, विनोद बाफना, अजय खमेसरा, गुणवंत मालवी, रितेश मूणत, विकास कटारिया, नवीन गांधी, विनोद कटारिया, अभय गांधी आदि समाजजन ने तपस्वी का बहुमान किया।

प्रवर्तकश्री के दर्शनार्थ यात्रा निकाली

रतलाम। आचार्य उमेशमुनि जी के सुशिष्य प्रवर्तक जिनेंद्रमुनि जी की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी प्रवीणा श्रीजी, ज्योतिप्रभा जी, शुभोदया जी, रक्षा जी, हर्षिता जी, सियल जी वर्षावास के लिए श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल नौलाईपुरा स्थानक पर विराजित हैं। साध्वी मंडल के सान्निाध्य में युवा सराफा व्यापारी प्रियेश भरगट की 13 वर्षीय पुत्री मोक्षा भरगट ने केवल अचित पानी के आधार पर निराहार रहते 16 उपवास की तपस्या पूर्ण की। तपस्या पूर्ण होने पर कई श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्ना तप आदि आराधनाओं की बोली लेकर श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ की ओर से शाल ओढ़ाकर, माला पहनाकर बहुमान किया।

मोक्षा के मामा परिवार व राजमल चोपड़ा द्वारा स्तवन की प्रस्तुति दी गई। तपस्या के उपलक्ष्‌य में प्रभावना का लाभ मोहनबाई राजमल भरगट परिवार ने लिया। संचालन अणु मित्र मंडल के सचिव सौरभ कोठारी ने किया। मोक्षा भरगट की तपस्या के अनुमोदनार्थ भरगट व लोढ़ा परिवार द्वारा चौबीसी का आयोजन किया गया। विभिन्ना संस्थाओं द्वारा तपस्वी मोक्षा का बहुमान किया गया। पश्चात प्रभावना वितरित की गई। तपस्या के उपलक्ष्‌य में मोहनबाई राजमल भरगट परिवार द्वारा प्रभु भक्ति का आयोजन देवश्री गार्डन में किया गया