Thursday, September 29, 2022
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News India Desk:भारत गेहू को लेकर संकट में, जानिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक का सारा गणित

News India Desk:भारत गेहू को लेकर संकट में, जानिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक का सारा गणित,केंद्र सरकार ने 13 मई से गेहूं के निर्यात पर और 12 जुलाई से आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद गेहूं के भाव में अभी कमी आने का नाम नहीं ले रही है। फिलहाल खुले बाजार में इसका रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 300-400 रुपये ज्यादा ही चल रहा है. जानकार बता रहे हैं कि इस साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भावनाएं ऐसी हैं, जिसे देखते हुए इसके मूल्य में कमी की उम्मीद नहीं है. तो क्या यह माना जाए कि भारत में गेहूं का संकट है?

गेहूं इस साल दो वजहों से चर्चा में है। विश्व के दो प्रमुख गेहूँ उत्पादक देशों रूस और यूक्रेन के युद्ध में उलझे रहने से विश्व स्तर पर संकट उत्पन्न हो गया था। क्योंकि गेहूं के व्यापार में इन दोनों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। ऐसे में भारत को निर्यात का अच्छा मौका मिला। रिकॉर्ड निर्यात के बीच हीट वेब के कारण उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसलिए दोनों घटनाओं को मिलाकर एक ऐसा माहौल तैयार किया गया जिसमें गेहूं के मूल्य में काफी वृद्धि हुई।

ये है गेहूं का पूरा गणित

असली सवाल यह है कि क्या इस साल गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं क्योंकि हमारे पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है? डेटा से हम उत्पादन, खपत और निर्यात के पूरे गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

वर्ष 2021-22 में गेहूं का उत्पादन 106.41 मिलियन टन होने का अनुमान है।
30 जून 2022 तक भारतीय खाद्य निगम और राज्य एजेंसियों के पास 28.51 मिलियन टन गेहूं का भंडार है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, भारत में गेहूं की घरेलू मांग 94.45 मिलियन टन है।
2021-22 में 72 लाख टन गेहूं का निर्यात किया, हालांकि लक्ष्य 10 लाख टन था।
वर्ष 2020-21 में भारत ने केवल 21.55 लाख मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया।
फिर गेहूं को लेकर संकट का माहौल कौन बना रहा है?
इससे साफ है कि गेहूं की कोई कमी नहीं है। केवल वही बड़े व्यापारी और निर्यातक माहौल बना रहे हैं, जिन्होंने निर्यात के लिए किसानों से गेहूं खरीदा और अचानक सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि अच्छी बात यह है कि खुले बाजार में किसानों को एमएसपी से बेहतर कीमत मिल रही है. वैसे ज्यादातर किसान पहले ही व्यापारियों को गेहूं बेच चुके थे। वर्तमान में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि एपीडा के मुताबिक इस साल किसानों को एमएसपी से 135 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा कीमत मिली है.

क्या कहा कृषि मंत्री ने?

इन आंकड़ों के चलते केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दावा किया है कि देश में गेहूं का संकट नहीं है. उनका कहना है कि भारत अपनी घरेलू जरूरत से ज्यादा गेहूं पैदा करता है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2021-22 के दौरान गेहूं का उत्पादन 106.41 मिलियन टन होगा। जो पिछले पांच वर्षों (वर्ष 2016-17 से 2020-21) के दौरान हुए 103.89 मिलियन टन गेहूं के औसत उत्पादन से अधिक है।

  • देश की खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन और पड़ोसी और कमजोर देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात नीति को ‘मुक्त’ से ‘निषिद्ध’ में बदल दिया है। हालांकि, अन्य देशों को निर्यात को भी उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने और उनकी सरकारों के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा दी गई अनुमति के आधार पर अनुमति दी जाएगी।