Wednesday, October 5, 2022
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Non performing asset (NPA) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज्यादा कमी आई है, फिर भी कुल फंसे कर्ज में उनकी हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है।

Non Performing Asset (NPA) : महामारी से उबरने के बाद रूस-यूक्रेन संकट, महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के असर के बीच देश की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है. अप्रैल-जून तिमाही में 31 सूचीबद्ध बैंकों का सकल एनपीए 1.85 फीसदी घटकर 5.66% रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 7.51% था। 2015 के बाद इतना कम एनपीए अनुपात कभी नहीं रहा। हालांकि, कर्ज बट्टे खाते में डालने की भी इसमें भूमिका रही है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सकल एनपीए अनुपात में सबसे ज्यादा 2.21 फीसदी की कमी आई है। पिछली तिमाही के लिए एनपीए अनुपात 7.18% रहा, जबकि एक साल पहले यह 9.39% था। इस अवधि के दौरान निजी बैंकों का सकल एनपीए 1.10 प्रतिशत और लघु वित्त बैंकों का 2.07 प्रतिशत घट गया। इसके बावजूद, देश की बैंकिंग प्रणाली के कुल एनपीए में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी लगभग 80% रही, जो लगभग पिछले वर्ष के समान ही है।

पांच प्रमुख संहिताओं, न्यायाधिकरणों ने एनपीए कम करने में मदद की
फॉर्च्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक के बाद एक पेश किए गए इन समाधान तंत्रों ने भारतीय बैंकों के एनपीए अनुपात को कम करने में प्रमुख भूमिका निभाई है।

ट्रिब्यूनल से एनपीए कम करने में मदद

  1. दिवाला और दिवालियापन संहिता
  2. वन टाइम सेटलमेंट
  3. ऋण वसूली न्यायाधिकरण
  4. कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन
  5. सरफेसी अधिनियम

नए एनपीए में कमी सबसे बड़ी उपलब्धि
बैंकिंग सिस्टम में एनपीए घटने के कई कारण हैं। इनमें बड़े पैमाने पर वसूली, ऋण पुनर्गठन और बट्टे खाते में डालना शामिल है। इसका मुख्य कारण कम फिसलन अनुपात है। यानी नए एनपीए के मामलों में तेजी से कमी आई है।- मदन सबनवीस, मुख्य अर्थशास्त्री, बैंक ऑफ बड़ौदा