Friday, September 30, 2022
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Petrol-Diesel Price : आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते जाने क्यों

Petrol-Diesel Price : आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इसकी वजह देश की सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 10,196.94 करोड़ का घाटा हुआ है। यह कंपनी को किसी भी तिमाही में सबसे ज्यादा घाटा है।

पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 1,795 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वहीं, जनवरी-मार्च तिमाही में यह आंकड़ा 1,900.80 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। इससे पहले, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने भी अप्रैल-जून में 1,992.53 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 5,941.37 करोड़ रुपये और जनवरी-मार्च तिमाही में 6,021.9 करोड़ रुपये था।

नुकसान की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ सकती हैं
देश की दो बड़ी सरकारी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ के नुकसान से उबरने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं, ताकि इस नुकसान की भरपाई की जा सके.

महंगा तेल लेकर सस्ता तेल बेचने से होता है नुकसान
अप्रैल-जून तिमाही में भारत में कच्चे तेल का आयात औसतन 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन खुदरा पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें 85-86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। इससे कंपनियों को नुकसान हुआ है। IOCL ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पेट्रोल और डीजल को 10 रुपये और 14 रुपये प्रति लीटर के नुकसान पर बेचा।

कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कच्चा तेल लंबे समय से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। इससे भारतीय कंपनियों को भी महंगा कच्चा तेल आयात करना पड़ रहा है। हालांकि भारत ने रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल भी खरीदा है। कितना और किस रेट पर खरीदा इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

सरकार ने कहा है कि तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, तीन सरकारी तेल कंपनियों ने दरों को फ्रीज करने के कारणों के बारे में ब्योरा नहीं दिया है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें कैसे निर्धारित की जाती हैं?
जून 2010 तक, सरकार पेट्रोल की कीमत तय करती थी और इसे हर 15 दिन में बदल दिया जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमत तय करने का काम तेल कंपनियों पर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार तय करती थी, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने यह काम तेल कंपनियों को सौंप दिया|

तब से तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर, कर, पेट्रोल और डीजल की परिवहन लागत और कई अन्य चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल और डीजल की कीमत तय करती हैं।

6 अप्रैल के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछली बार 6 अप्रैल को बढ़ोतरी की गई थी। यानी 4 महीने से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं. वहीं, मई में सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये की कटौती की थी। इससे पेट्रोल 9.5 रुपये और डीजल 7 रुपये सस्ता हुआ।