Thursday, October 6, 2022
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Rajsthan News: सरकारी अंग्रेजी स्कूल में हिंदी मीडियम के बच्चों को पढ़ने पर हो रही परेशानी

Rajsthan News: सरकारी अंग्रेजी स्कूल में हिंदी मीडियम के बच्चों को पढ़ने पर हो रही परेशानी राजस्थान में बीते दिनों खुले इंग्लिश मीडियम स्कूलों (Government English School) ने जितनी अभिभावकों को राहत प्रदान की उतनी ही परेशानी भी बढ़ा दी है|

दरअसल, राजस्थान के शिक्षा विभाग (Education Department) ने बजट घोषणा पूरी करने के लिए हाल ही में सरकारी अंग्रेजी स्कूलों की झड़ी लगा दी और कदम वाकई सरहनीय भी था क्योंकि अभिभावक महंगी प्राइवेट स्कूलों में फीस देते देते थक गए थे और कोरोना काल के बाद ऐसी स्थिति रही कि कई बच्चों ने आर्थिक स्थिति के चलते अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी. लेकिन इसी बीच महात्मा गांधी सरकारी स्कूलों को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलने लगा क्योंकि कम पैसों में बच्चों को अच्छी पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा था. लेकिन इस पूरे क्रम से हिंदी माध्यम वाले बच्चों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई. कई हिंदी स्कूलों को अंग्रेजी में क्रमोन्नत करने से हिंदी माध्यम वाले बच्चों को पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी लेकिन इसके समस्या आने के कुछ दिन बाद ही शिक्षा मंत्री बीड़ी कल्ला ने इसका हल भी ढूंढा|

कुछ दिनों पहले हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों को दी थी मंत्री कल्ला ने राहत

  • काफ़ी समय से इसका विरोध कर रहे थे अभिभावक
  • हिंदी माध्यम का विकल्प वाले विध्यर्थियों को पास के विद्यालय में दिलाया जाएगा प्रवेश
  • अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी रहेंगे नियमित
  • मंत्री बीडी कल्ला ने अभिभावकों को दिलाई थी राहत
  • लेकिन अभी भी इस परेशानी का हल पूरी तरह से नहीं आया सामने
  • इतना ही नहीं निदेशालय ने भी दिया ये सुझाव कि स्कूल के अंग्रेजी माध्यम में बदलने पर विद्यार्थियों की रुचि हो रही कम
  • बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थी माध्यम बदलने में नहीं दिख रहे उत्सुक
  • ऐसे में प्रथम वर्ष में पहली से पांचवीं कक्षा ही अंग्रेजी माध्यम में बदले
    हाल ही सरकार ने 211 स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदला था
  • अधिकतर स्कूलों में बच्चे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने का विकल्प नहीं दे रहे
  • हिंदी माध्यम का चयन करने वाले बच्चों को दूसरे स्कूलों में किया जा रहा शिफ्ट
  • इससे अभिभावक को हो रही परेशानी

प्रदेश में दो पारी में अंग्रेजी व हिन्दी दोनों मीडियम में संचालित करने की मांग की जा रही है. इसके लिए हर तरफ विरोध की आवाज उठ रही है प्रदेश में कई जगह ऐसे विद्यालय हैं जिनके 5 किलोमीटर की परिधि में कोई विद्यालय नहीं है. जिनसे हिन्दी माध्यम के छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे.
जिन स्कूलों को हिंदी से अंग्रेजी माध्यम में कन्वर्ट किया गया है.अभिभावकों की मांग है कि जहाँ करीब 350 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं. इनमें 180 बच्चे हिंदी मीडियम के हैं, जिन्हें दूसरे स्कूल में शिफ्ट होना पड़ेगा. इसके कारण कई विद्यार्थी पढ़ाई मजबूरी में छोड़ देंगे. ऐसे में हिंदी व अंग्रेजी मीडियम दोनों ही इसी स्कूल में विभिन्न पारियों में चलाया जाए ताकि बच्चों को किसी तरह की समस्या नहीं आए.

अंग्रेजी से है उज्जवल भविष्य या हिंदी खतरे में !

  • प्रदेश में अंग्रेजी स्कूलों की हुई बढ़ोतरी
  • सरकारी अंग्रेजी स्कूलों को अभिभावकों का मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
  • बच्चों के सुनहरे फ्यूचर के लिए खोली गई इंग्लिश स्कूलों
  • लेकिन इन स्कूलों के बाद हिंदी माध्यम पर आया संकट
  • हिंदी से अंग्रेजी माध्यम में कन्वर्जन पर बढ़ रहा विरोध
  • हिंदी के साथ अंग्रेजी को भी चलाने की मांग

बच्चों को दूर शिफ्ट करने से पढाई से होंगे वंचित

  • कई अभिभावक कहीं और शिक्त करने से हैं नाराज
  • जहाँ अंग्रेजी के विकल्प वाले विद्यार्थी कम
  • उन्हें हिंदी में ही रहने दिए जाने की मांग

महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने के पीछे सरकार भले ही विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य देख रही हो, लेकिन इन स्कूलों को लेकर आधी-अधूरी तैयारी विद्यार्थियों के वर्तमान पर भारी पड़ रही है. लेकिन कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां विरोध के स्वर उठने लगे हैं. उदयपुर के कई स्कूलों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. वहां के क्षेत्रवासियों और अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूल में भेजना नहीं चाहते हैं और उसी स्कूल में दो पारियों में अंग्रेजी व हिंदी माध्यम चलाने की मांग कर रहे हैं. वहीं, स्कूलों में हालात यह है कि अभी अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के दोनों बच्चों को साथ बैठाने के लिए स्कूलों में जगह कम पड़ रही है. अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में स्टाफ भी पूरा नहीं है, अब तक साक्षात्कार प्रक्रिया का दौर चल रहा है. ऐसे में बच्चों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है|

जुलाई का महीना बच्चों के लिए लाता है नया सत्र:-

  • शिक्षण सत्र का सबसे जरुरी हिस्सा होता है जुलाई का महीना
  • सितंबर में आयोजित होने वाली परिक्षों के लिए होती है अधिक पढ़ाई
  • प्रथम परख में लगभग 45 प्रतिशत तक कोर्स हो जाना जरुरी
  • लेकिन इस महीने ज्यादातर जगह हिंदी अंग्रेजी की छिड़ी जंग
  • ऐसे में इस दुविधा से बच्चो की पढ़ाई पर आ रहा संकट

जुलाई माह शिक्षण सत्र का सबसे महत्वपूर्ण माह होता है. इसमें सितंबर में आयोजित होने वाली प्रथम परख को देखते हुए कोर्स कराना होता है. प्रथम परख में लगभग 45 प्रतिशत तक कोर्स हो जाना चाहिए. इसी के आधार पर परख का आयोजन होता है. वहीं, इस माह तो अधिकांश स्कूलों में हिंदी व अंग्रेजी की जंग छिड़ी हुई है. स्कूलों में पढ़ाई हिंदी में होगी या अंग्रेजी में इसे लेकर विद्यार्थियों का भविष्य अधरझूल में है. अभी स्कूलों में हिंदी व अंग्रेजी के बच्चे साथ ही पढ़ रहे हैं और शिक्षक भी असमंजस में हैं कि अंग्रेजी में पढ़ाई कराई जाए या हिंदी में. अब तक कई स्कूलों में अंग्रेजी का स्टाफ भी नहीं आया है. साक्षात्कार की प्रक्रिया 1 व 2 अगस्त को विभाग की ओर से की जा रही है. अंग्रेजी विद्यालय से अन्य सरकारी विद्यालय ज्यादा दूरी पर है तो अभिभावक बच्चों को भेजने में असमर्थ हैं, जिससे कई विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है|

विद्यालय भवनों में कमरों की संख्या पहले से ही काफी कम

  • ऐसे में एक साथ अंग्रेजी व हिंदी के बच्चों को बैठाना संभव नहीं
  • कई हिंदी के विद्यार्थियों को अंग्रेजी मीडियम में ही पढ़ने पर मजबूर होना होगा क्योंकि वे अन्यत्र नहीं जाना चाहते
  • ऐसे में अंग्रेजी मीडियम चुनने वालों की पढ़ाई प्रभावित होगी.
  • कई स्कूलों में हिंदी मीडियम के विद्यार्थी अधिक हैं तो ऐसे में अभिभावक मांग कर रहे हैं कि वह स्कूल हिंदी ही रहने दिया जाए, अंग्रेजी वालों को कहीं ओर भेजा जाए
  • कई ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका विद्यालय में बालिकाओं के लिए आसपास बालिका विद्यालय नहीं मिल रहा है ऐसे में उन की पढ़ाई भी प्रभावित होनी स्वाभाविक है.
  • वहीं अंग्रेजी पढ़ाने के लिए विधायलयों में पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है.