Sunday, September 25, 2022
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इस साल रक्षा बंधन पूरे दिन भद्रा की छाया में रहने वाला है, भद्रा में नहीं बांधता रक्षा सूत्र, तो जाने शुभ मुहूर्त !

Raksha Bandhan Auspicious Time :अगले सप्ताह गुरुवार 11 अगस्त को सावन मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा और रक्षा बंधन है। इस साल रक्षा बंधन पूरे दिन भद्रा की छाया में रहने वाला है। ज्योतिषियों को सलाह दी जाती है कि भद्रा के समय रक्षा सूत्र नहीं बांधें।

उज्जैन के ज्योतिषी पं. मनीष शर्मा, रक्षाबंधन पर भाद्र हो तो रक्षा सूत्र बांधने का समय छोड़ देना चाहिए। इस बार सावन पूर्णिमा 11 अगस्त को सुबह 11.08 बजे से शुरू होगी। अगले दिन यानी 12 अगस्त को सुबह 7.16 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। इसके बाद भाद्रपद मास की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। पंचांग के अंतर के कारण 12 अगस्त को कई क्षेत्रों में रक्षा बंधन पर्व मनाया जाएगा.

सूर्योदय से पूर्णिमा तक तीन मुहूर्त से कम समय तक चलेगा। इसलिए 11 अगस्त को रक्षा बंधन का पर्व मनाना अधिक शुभ रहेगा। 11 अगस्त को पूरे दिन भद्रा रहने वाली है। भद्रा रात 8.30 बजे समाप्त होगी। तभी रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। इस दिन सुबह 8.30 बजे से रात 9.55 बजे तक चारा चौघड़िया रहेगा। इस दौरान रक्षा धागा बांधना ज्यादा शुभ रहेगा।

रक्षाबंधन पर ऐसे बनाएं वैदिक रक्षा सूत्र

सावन मास की पूर्णिमा को प्रात: स्नान कर देवताओं की पूजा करें। पितरों की पूजा करें। इस दिन रात 8.30 बजे के बाद सरसों, केसर, चंदन, चावल, दूर्वा और सिक्के के साथ सूती या रेशमी पीले कपड़े बांधें। घर के मंदिर में कलश की स्थापना करें और उस पर वैदिक रक्षा सूत्र रखें। विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के बाद अपने दाहिने हाथ में अपनी बहन से या किसी ब्राह्मण से वैदिक रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह रक्षा सूत्र एक साल तक हमारी रक्षा करता है।

रक्षाबंधन पर ऐसी रहेगी ग्रहों की स्थिति

रक्षा बंधन के दिन गुरु मीन राशि में वक्री होंगे। चंद्रमा शनि के साथ मकर राशि में रहेगा। इन ग्रहों की युति विष योग का निर्माण करती है। गुरु की दृष्टि सूर्य पर, सूर्य शनि पर और शनि की दृष्टि गुरु पर होगी। ग्रहों के इन योगों में हमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जरा सी लापरवाही भी नुकसान पहुंचा सकती है।

सावन पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये शुभ कार्य

पूर्णिमा के दिन जरूरतमंद लोगों को नए कपड़े, जूते और छतरियां दान करनी चाहिए। मंदिर में पूजा सामग्री चढ़ाएं। गौशाला में गायों की देखभाल के लिए दान करें। सुबह सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। हनुमान जी के सामने धूप-दीप जलाएं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या हनुमान जी मंत्रों का जाप करें। जल और दूध से शिव का अभिषेक।

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