Tuesday, March 28, 2023
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RSS News: मार डालो ##@ …. आरएसएस # को… गुस्ताखे नबी का सर चाहिये…

RSS News: मार डालो ##@ …. आरएसएस # को… गुस्ताखे नबी का सर चाहिए…

सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति थी कि उन्होंने 1948 में ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद का भारत में विलय करा लिया। करीब 74 साल बाद हैदराबाद से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, अगर जगह का नाम न बताया जाए तो इसे आप सुनकर किसी इस्लामिक देश का कहेंगे।

1947 में भारत स्वतंत्र हो गया था, लेकिन हैदराबाद की ने भारत में विलय होने से मना कर दिया। वहां का निजाम पाकिस्तान के साथ जाना चाहता था। यह लौह पुरुष सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति थी कि उन्होंने 1948 में ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद का भारत में विलय करा लिया।

विधायक टी राजा ने पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी की तो उनकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद उन्हें जमानत मिली तो हैदराबाद में कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। सर तन से जुदा करने के नारे लगने लगे। वीडियो देखकर लगेगा कि जैसे शरिया लागू है और किसी की हत्या करने की धमकी देने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होगी।

एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कट्टरपंथियों की भीड़ सड़कों पर नारे लगा रही है कि गुस्ताखे नबी का सर चाहिए, मार डालों ##@, आरएसएस वालों को ।
असदुद्दीन ओवैसी ने भी बयान दिया और ट्वीट किया कि जब तक टी राजा को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। लेकिन विरोध का तरीका होता, क्या सर तन से जुदा करने की बात कहना हत्या की धमकी नहीं है ? इन वीडियो और कट्टरपंथियों की इस हरकत का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध भी हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने ट्वीट किया कि पर्शिया 100 साल में ईरान बन गया था, भारत भी पर्शिया के रास्ते पर चल रहा है। 2022 का नारा ध्यान से सुनिए, और 2047 की कल्पना करिए। कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया कि वो लोग सड़क पर निकल चुके हैं देश विरोधी नारे लेकर, देश के भक्तों तुम भी निकलो भारत के जयकारे लेकर। देश संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं।

ये था ऑपरेशन पोलो

कश्मीर और हैदराबाद ” लौह पुरुष” के नाम से विख्यात सरदार पटेल को भारत के गृहमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीर मामले को सुलझाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। वे कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के पक्षधर नहीं थे। हैदराबाद के भारत में विलय के प्रस्ताव को निजाम द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने पर उन्होंने अंततः वहां सैनिक अभियान का निर्देश दिया। 13 सितम्बर, 1948 को सैनिक हैदराबाद पहुंच गए और सप्ताह भर में ही हैदराबाद का भारत में विधिवत् विलय कर लिया गया।

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