Tuesday, September 27, 2022
Homeधर्म विशेषसावन के महीने में फल, दूध, रुद्राक्ष आदि दान करने से आपके...

सावन के महीने में फल, दूध, रुद्राक्ष आदि दान करने से आपके जीवन में आएगी सुख सम्पत्ति जाने कैसे करना है दान …

Shravan Mas : सावन मास 11 अगस्त तक चलेगा। इसमें शिव पूजा के साथ-साथ दान और पेड़-पौधे लगाने का भी बहुत महत्व है। शिव पुराण में कहा गया है कि सावन के महीने में किया गया दान सभी प्रकार के सुख, वैभव और पुण्य देता है। वहीं अन्य पुराणों में बताया गया है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने के साथ-साथ पूजा किए गए पेड़-पौधे लगाने और दान करने से अन्य देवता और पूर्वज भी शिव को प्रसन्न करते हैं।

विद्या दान है दीपक के समान
श्रावण मास में प्रतिदिन दीप दान करने का विशेष महत्व है। दीप का अर्थ है ज्ञान का प्रकाश। दीप की पूजा में ही प्रकाश फैलाने की प्रेरणा निहित है। इसका मतलब है कि हमें शिक्षा और दान के क्षेत्र में दृढ़ संकल्प के साथ प्रवेश करना चाहिए, ताकि भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सके।

सावन में दूध और फलों के रस का दान
धार्मिक ग्रंथों के जानकार पुरी के डॉ. गणेश मिश्र कहते हैं कि सावन के महीने में कुछ भी दान करने से कई गुना पुण्य फल मिलते हैं। इस महीने में रुद्राक्ष, दूध, चांदी के सांप, फलों का रस और आंवला का दान करने से अनजाने में किए गए पाप समाप्त हो जाते हैं। साथ ही इस माह में पौधे लगाने से पितरों की प्रसन्नता होती है। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि जो व्यक्ति दान करने में आनंद लेता है, उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है क्योंकि देने से व्यक्ति श्रेष्ठ और गुणवान बनता है।

रुद्राक्ष का दान करने से सुख और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है
सावन के महीने में शिव की आराधना के अलावा शिव पुराण की कथाएं पढ़ना और सुनना और मंत्रों का जाप करना भी दान का बहुत महत्व है। सावन के महीने में चांदी के सिक्के दान करने से या शिवलिंग पर चांदी से बने सांपों और नागों की मूर्तियों को चढ़ाने से प्राप्त पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इससे धन में वृद्धि होती है। शिवालयों में वैदिक ब्राह्मणों को रुद्राक्ष की माला दान करने से सुख में वृद्धि होती है।

पेड़ लगाने से प्रसन्न होते हैं पितृ और देव
श्रावण मास में बिल्वपत्र, शमीपात्र, शिवलिंगी, अशोक, मदार और आंवला लगाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इनके साथ ही अनार, पीपल, बरगद, नीम और तुलसी के पौधे लगाने से पितरों की प्रसन्नता होती है। पौधे लगाने के साथ-साथ इन पेड़-पौधों का दान करने से भी समान पुण्य मिलता है।