Sunday, September 25, 2022
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सोते वक्त कभी ना करे ये काम, रोशनी से होती हैं कई बीमारियां, जाने

Sote Vakt Kabhi Na Kare Ye Kaam:आप अपनी और अपने परिवार की सेहत का ध्यान बेहतर ढंग से रख सकें, इसके लिए हम ‘वीकली हेल्थ ब्रीफ’ लाए हैं। इसमें आपको मिलेंगे प्रमुख हेल्थ अपडेट्स, महत्वपूर्ण रिसर्च से जुड़े आंकड़े और डॉक्टरों की रेलेवेंट सलाह। इसे मात्र 2 मिनट में पढ़कर आपको सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारियां मिलेंगी और आप परिवार का बेहतर ख्याल रख पाएंगी।

अमेरिका के रहने वाले एक शख्स के प्राइवेट पार्ट (अंडकोश) से सीटी जैसी आवाज आ रही थी। उसने अपनी जांच कराई तो ‘विस्लिंग स्क्रोटम’ नाम की अनोखी बीमारी का पता चला। इस बीमारी के चलते शख्स के शरीर में काफी हवा भर गई है। जिसके चलते उसके प्राइवेट प्रार्ट से सीटी जैसी आवाज आती है। डॉक्टरों के मुताबिक यह दुनिया का ऐसा पहला केस है। डॉक्टरों ने एक्सेस हवा को निकालने के लिए शख्स की छाती में दो ट्यूब लगाए हैं।

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लाइट बुझाकर नहीं सोए तो ब्लड प्रेशर, शुगर और मोटापे का खतरा होगा

स्लीप मैगजीन में छपे एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, बिना बत्ती बुझाए सोना खतरनाक हो सकता है। इस रिसर्च में पाया गया है कि लाइट ऑन करके सोने वाले लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर और मोटापे का खतरा ज्यादा होता है। 60 से 80 साल तक के बुजुर्गों की लगातार कुछ समय तक नींद, उनके कमरे की लाइट और उनकी सेहत की निगरानी की गई। जिसके बाद रिसर्चर्स इस निष्कर्ष पर पहुंचे। सोते वक्त कमरे में मध्यम लाइट भी आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। अच्छी नींद के लिए डॉक्टर्स भी अंधेरे कमरे में सोने की सलाह देते हैं।

मेंटल प्रॉब्लम है तो घूमने जाइए, दवा से ज्यादा असरदार है टूरिज्म, शोध में दावा

एक नए शोध में दावा किया गया है कि मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे लोगों के लिए घूमना काफी फायदेमंद हो सकता है। घूमने का मतलब केवल टहलना नहीं, बल्कि किसी डेस्टिनेशन पर जाना है। ऑस्ट्रेलिया के एडिन कोवान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि डिमेंशिया और अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए कई मायनों में घूमना दवा से ज्यादा लाभदायक हो सकता है। शोध करने वाले एक डॉक्टर का कहना है कि मेंटल हेल्थ से जूझ रहे लोगों के लिए ट्रैवलिंग को इलाज का दर्जा दिया जाना चाहिए।

मिस-केरेज और मां नहीं बन पा रही महिलाओं को स्ट्रोक का खतरा ज्यादा

यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मिस केरेज या मां न बन पाने वाली महिलाओं को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। इस रिसर्च में पाया गया है कि जो महिलाएं मृत बच्चे को जन्म देती हैं। उनको भी इसका खतरा होता है। इस शोध में पश्चिमी देशों की 6 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़े जुटाए गए थे। इनमें से स्ट्रोक से जूझ चुकी 2.8% महिलाओं में से अधिकर कभी न कभी मिस केरेज से जूझ चुकी थीं या मां नहीं बन पा रही थीं।

मेन्स्ट्रुअल हेल्थ केवल सफाई नहीं, यह हेल्थ और ह्यूमन राइट का मामला है WHO

अपने एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष में विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने माना है कि मेन्स्ट्रुअल हेल्थ केवल हाइजीन से रिलेटेड विषय नहीं है। WHO ने मेन्स्ट्रुअल हेल्थ को महिलाओं के लिए हेल्थ और ह्यूमन राइट से जुड़ा मामला माना है। इससे जुड़ा प्रस्ताव मेन्स्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट और जेंडर इक्वालिटी पर ह्यूमन राइट्स काउंसिल की 50 बैठक में पारित किया गया। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि अब दुनिया भर के देश इसको ध्यान में रखते हुए कानून बनाएंगे, जो महिलाओं के ज्यादा हित में होगा।

मानसिक रूप से परेशान होने पर खुद को चोट पहुंचाती हैं महिलाएं, शोध में दावा

स्वीडन के कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मानसिक रूप से परेशान होने पर महिलाओं में खुद को चोट पहुंचाने की प्रवृति अधिक होती है। इस शोध के लिए ऐसी 41 महिलाओं को चुना गया था जिन्होंने पिछले दिनों खुद को चोट पहुंचाई हो। इससे यह बात भी निकल कर आई कि ऐसी महिलाओं में दर्द सहने की शक्ति भी बाकियों की तुलना में ज्यादा होती है।

हार्मेन के चलते महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम खुजली होती है

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को स्किन प्रॉब्लम की दिक्कतें कम होती हैं। उन्हें खुजली भी पुरुषों के मुकाबले कम ही होती है। अब रिसर्चर्स ने इसके लिए हार्मोन को जिम्मेदार बताया है। जापान के क्वोटो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि महिलाओं के शरीर में कुछ खास तरह के हार्मोन बनते हैं, जो पुरुषों में नहीं बनते। ये हार्मोंस महिलाओं को खुजली और दूसरी स्किन प्रॉब्लम्स से बचाते हैं।

मांसाहारी बच्चों को मोटापे का खतरा ज्यादा, शाकाहारी रहते हैं स्लिम

कनाडा के टोरंटो स्थित सेंट मिशेल्स हॉस्पिटल के एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि मांसाहारी बच्चों को मोटापे का खतरा अधिक होता है। इस रिसर्च में यह भी बताया गया है कि मांसाहारी बच्चों की तुलना में शाकाहारी बच्चों का वजन आधे से कम तक हो सकता है। रिसर्चर्स 2 से 5 साल के 9 हजार बच्चों पर शोध करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। शोध में शामिल ज्यादातर मांसाहारी बच्चे ओवर वेट पाए गए। जबकि उनकी उम्र के ज्यादातर शाकाहारी बच्चों का वजन सामान्य था।