खेती-किसानी

Sweet Potato farming: शकरकंद की खेती कर किसान हुए मालामाल, जानिए उन्नत किस्में सहित बुवाई का समय

Sweet Potato farming: शकरकंद की खेती कर किसान हुए मालामाल, जानिए उन्नत किस्में सहित बुवाई का समय, अधिकांश किसान पारंपरिक तरीके से ही रबी, खरीफ और नदगी फसलों की खेती करते हैं लेकिन कुछ किसान नई वैज्ञानिक तकनीक से तरह-तरह की फसल का उत्पादन करते है। भारत में लगभग 2 लाख हेक्टेयर में शकरकंद की खेती की जाती है। इसकी खेती बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में किसान अधिक करते हैं। शकरकंद का स्वाद मीठा होता है. इसलिए इसे इंग्लिश में स्वीट पोटैटो भी कहा जाता है। आइये जानते है शकरकंद की खेती से होने वाले फायदे के बारे में.

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शकरकंद की किस्में

अगर आप भी ज्यादा उत्पादन करना चाहते है तो उसके लिए आपको अच्छी किस्मों का इस्तेमाल करना होगा। जैसे- वर्षा, श्रीनंदिनी, श्री वर्धिनी, श्रीरत्न, क्रॉस-4, कालमेघ, राजेंद्र शकरकंद-5, श्रीवरुण, श्रीअरुण, श्रीभद्र, कोंकण अश्विनी, पूसा सफेद, पूसा सुनहरी आदि यह किस्म ज्यादा उपज के लिए फायदेमंद है।

रोपण और बुवाई का समय

किसी भी मौसम में शकरकंद की खेती की जा सकती है। इसके पौधे 25 से 34 डिग्री तापमान में अच्छी तरह से ग्रोथ करते हैं। लेकिन इसकी ज्यादा पैदावार होने के लिए गर्मी और बारिश का मौसम सबसे अच्छा होता है। इसके पौधे का रोपण का समय जून और अगस्त महीने होता है। इसके लिए बीज बोन के समय नर्सरी तैयार करके मेड़ों पर की जाती है। मेड़ो में करीब एक फीट की दूरी होनी चाहिए। जिससे पौधे की पैदावार अच्छी होती है।

मिट्टी और बीज

इसकी खेती आलू की तरह की जाती है। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी ज्यादा उपयुक्त माना गया है। वहीं, मिट्टी का PH मान 5.8 से 6.8 के बीच होना चाहिए। इसकी ज्यादा उत्पादन के लिए सड़ी हुई 25 टन गोबर की खाद को मिट्टी में मिला सकते है। एक एकड़ खेती के लिए 250 से 340 किलो बेल की जरूरत होती है। इसके लिए बेल की शीर्ष और मध्य भाग की ही कटिंग के लिए इस्तमाल करते है। इसकी जड़ों की कटिंग के समय एक-एक कटिंग में 4 से 5 गाठें निकलनी चाहिए।

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कीट और रोग

शकरकंद की खेती में कीड़े लगने का खतरा ज्यादा होता है। इसकी रोकथाम के लिए पौधों पर इमिडाक्लोप्रिड की उचित मात्रा में छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा पौधों पर नीम के तेल का छिड़काव रोग दिखाई देने के तुरंत बाद 10 दिनों के अंतराल में 2 से 3 बार करना चाहिए। इस पौधे में रोग भी हो सकता है। यह पौधों में अगेती झुलसा रोग फफूंद की वजह से फैलता है। इसकी फफूंद मौसम परिवर्तन में के दौरान मौसम में अधिक नमी और उमस के वजह से होती है। ऐसे में फसल का ध्यान रखना चाहिए।

एक हेक्टेयर में होगा इतना मुनाफा

एक हेक्टेयर में शकरकंद की खेती में 25 टन तक पैदावार मिल सकती है। ऐसे में आप 10 रुपये किलो भी शकरकंद बेचते हैं, तो 25 टन शकरकंद बेचकर ढ़ाई लाख रुपये की कमाई कर सकते हैं। इसकी खेती करना बहुत ही आसान है। इसकी खेती में कम लागत लगती है और ज्यादा मुनाफा प्राप्त होता है।

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